उत्तराखण्ड का जलियांवाला: तिलाड़ी शहीदी दिवस पर 7 जगह गोष्ठियों का आयोजन: वन अधिकार आंदोलन

*मुख्य बिंदु* –

*तिलाड़ी कांड के शहीदों को मौन रख दी श्रद्धांजलि
*ग्रामीणों के वन अधिकार भल करने की मांग
*फ्री पानी की मांग
*ग्रमीण इलाकों में पंचायत की घोषणा
*हल्द्वानी और अल्मोड़ा में सम्मेलन

यहां हुवे कार्यक्रम-
1. हिंदी भवन, देहरादून
2. बनचौरा, उत्तरकाशी- श्री किशोर उपाध्याय जी द्वारा
3. चंबा, टिहरी गढ़वाल
4. श्रीनगर, पौडी गढ़वाल
5. हरिद्वार
6. अल्मोड़ा
7. पिथौरागढ़

30 मई 1930 को हुवे तिलाड़ी काण्ड दिवस पर आज 30 मई 2018 को देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, हरिद्वार, पिथौरागढ़ के 7 स्थानों पर “वन अधिकार आंदोलन” द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

देहरादून के स्थानीय हिंदी भवन में भी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत, प्रेम बहुखंडी (फ्रेंड्स ऑफ हिमालय), एस एन सचान (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सपा), इंदु नौडियाल ( जनवादी महिला), मोहन सिंह रावत व प्रदीप कुकरेती (उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच), कुलबीर सिंह (पूर्व डीएफओ), जितेंद्र भारती (साहित्यकार), सुरेंद्र सिंह सजवाण (सीपीआई), संजय जुयाल (सक्षम प्रशिक्षण संस्थान), उदवीर सिंह पंवार (उत्तराखण्ड अगेंस्ट करप्शन), शांति प्रसाद भट्ट (यूकेडी), जोत सिंह बिष्ट, मथुरा दत्त जोशी, अभिनव थापर, अमरजीत सिंह, संजय भट्ट, रेनु नेगी, परिणीता बडोनी, सुशील सैनी, नेमचंद, दीपक चन्द्र गिरी, विनीत पंवार, एस पी नोटियाल, पुनीत सिंह नेगी आदि ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि 30 जून 1930 को टिहरी रियासत के रवाईं क्षेत्र में टिहरी के राजा की फ़ौज ने निहत्ते किसानों को 3 तरफ से घेर कर गोलियों से भून कर मार दिया था। वो किसान अपने हक़ हकूकों के लिए आजाद पंचायत कर रहे थे। उनकी मांग राजा के कृषि पर लगे लगान – चरान – चुगान केके विभिन टेक्स के विरुद्ध थी। लेकिन टिहरी राजा के सैनिकों ने उन निहत्थों को तीन तरफ से घेर लिया और उनपर गोलियां बरसा दी। जिससे 17 लोग गोलियों से मारे गए और सैकड़ों अपनी जान बचाने के लिए जमुना नदी में कूद गए जिससे उनकी मौत हो गयी।

वक्ताओं ने कहा कि जल जंगल जमीन पर पहले लोगों के अपने अधिकार होते थे। जिससे लोग जंगल से लकड़ी, घांस, बजरी, पत्थर आदि जीवन यापन की सामग्री लाते थेऔर बदले में जंगल की सुरक्षा करते थे। जंगल मे लगी आग पर नियंत्रण करते थे। परंतु अब जंगल पर सरकारों का अधिपत्य हो गया और जंगल मे लगी आग को ग्रामवासी नहीं बुझाते।

वक्ताओं ने कहा कि जंगल के हक़ हकूक दोबारा प्राप्त करने के लिए वृहद आंदोलन की आवश्यकता है। जिसके लिए वन अधिकार आंदोलन लोगों के बीच जा कर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा और लोगों का समर्थन लेगा। साथ ही हल्द्वानी,अल्मोड़ा में भी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। आंदोलन में जनता को जोड़नेे का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए बैठक में यमकेश्वर, कोटद्वार, पौड़ी और टिहरी में जल्द ही पंचायतें लगाने का निर्णय लिया गया है।

साथ ही वक्ताओं ने कहा कि कितनी दुर्भग्यपूर्ण बात है कि जो उत्तराखंड देश को 60%पानी उपलब्ध कराता है वहीं के निवासी पेयजल के लिए भी टैक्स देते है। सरकार को हर ग्रामीण को 100 यूनिट बिजली प्रतिमाह, 1 गैस सिलेंडर हर महीने, घर बनाने के लिए रेत-बजरी-पत्थर फ्री, तथा निशुल्क पानी दिया जाना चाहिए।

गोष्ठी में तिलाड़ी कांड के शहीदों को एक मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई।

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