2014 एमबीबीएस बैच के छात्रों के इंटर्नशिप ओरिएंटेशन में हृदयाघात व कार्डियक अरेस्ट के….

The95news, ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से वर्ष 2014 एमबीबीएस के बैच के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंटर्नशिप ओरिएंटेशन कोर्स के तहत बुधवार को उन्हें कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए कार्डियो पल्मनरी रिससिकेशन सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं को हृदयाघात व कार्डियक अरेस्ट में अंतर के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने बताया कि आने वाले समय में संस्थान द्वारा उत्तराखंड के कोने कोने और सुदूरवर्ती इलाकों में लोगों को कार्डियक अरेस्ट व प्राथमिक उपचार के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इंटर्नस के लिए आयोजित स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि बेसिक लाइफ सपोर्ट बीएलएस की ट्रेनिंग की शुरुआत छात्र छात्राओं को एमबीबीएस प्रथम वर्ष से ही दी जानी चाहिए। निदेशक एम्स ने कहा कि जब विद्यार्थी इंटर्नशिप में पहुंचें तब उन्हें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सर्टिफाइड बेसिक लाइफ सपोर्ट कोर्स की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने बताया कि जीवन अमूल्य है लिहाजा उसे बचाने के लिए बीएलएस ट्रेनिंग नितांत आवश्यक है, इसीलिए संस्थान में एमबीबीएस व नर्सिंग स्टूडेंट्स को यह ट्रेनिंग कराई गई है। निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत ने बताया कि संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग देकर दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण से एक जिंदगी को बचाया जा सकता है।एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट हो सकता है लिहाजा यदि उसके साथी ने यह प्रशिक्षण लिया है तो वह पीड़ित के लिए मददगार साबित हो सकता है। 

इस अवसर पर यूएस के विजिटिंग प्रोफेसर डा.सुनील आहूजा व ट्रेनिंग को-ऑर्डिनेटर डा.प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हृदय असामान्य धड़कन रिद्म विकसित करता है। ऐसे में हार्ट पंप नहीं कर पाता। जबकि दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में रक्तवाहिनियों में अवरोध पैदा हो जाता है और हृदय के किसी एक हिस्से में रक्त का संचार बंद हो जाता है। जिससे उस हिस्से की कोशिकाएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में सांस व पल्स दोनों बंद हो जाती हैं। लिहाजा व्यक्ति हिलाने डुलाने पर कोई रिस्पांस नहीं करता, हार्ट अटैक में सांसे चल रही होती हैं पल्स भी मिलती हैं, व्यक्ति छाती में दर्द, पसीना आने की शिकायत करता है। इस दौरान इंटर्नस को सीपीआर कोर्स में कार्डियक अरेस्ट से जीवन बचाने के तौर तरीके बताए गए और कार्डियक अरेस्ट को पहचानने व आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के बारे में बताया। 

मौके पर मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष प्रो.शालिनी राव, डा. भरत भूषण, डा.अरुण मोहंती,डा.अरुण बर्गिस, डा.राजेश कुमार, डा.क्रांति रेड्डी, डा.पद्मानिधि, डा.कर्नव जैन,रूपेंद्र देयोल, हेमंत कुमार, जेवियर बेल्सी आदि मौजूद थे।

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