उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन 1994 रामपुर तिराहा कांड: हाईकोर्ट ने यूपी व उत्‍तराखंड सरकार को भेजा नोटिस

नैनीताल हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा गोलीकांड और महिलाओं के साथ हुवे दुराचार का स्वतः संज्ञान लेते हुए यूपी और उत्तराखण्ड राज्य को नोटिस जारी किए है।

हाईकोर्ट नैनीताल ने लिया स्वतः संज्ञान…

हाईकोर्ट ने राज्य आंदोलन के दौरान 02 अक्टूबर 1994 की रात राज्य आंदोलनकारियों और महिलाओं के साथ हुई बर्बता के मामले में सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं। हाईकोर्ट नैनीताल ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

 

प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश को बनाया पार्टी…

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को याचिका में पक्षकार बनाते हुए पूछा है इस मामले के जिम्मेदार पुलिस व प्रशासनिक अफसरों पर क्या कार्रवाई हुई और तमाम अदालतों में रामपुर तिराहा कांड से संबंधित मुकदमों का स्टेटस क्या है।

मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व मनोज तिवारी की खण्डपीठ ने लिया संज्ञान…

नैनीताल हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी मौजूद रहे। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में हुई । उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड सरकार की रामपुर तिराहे काण्ड पर उदासीनता के बाद 23 साल बाद कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है जिससे शहीद, घायल आंदोलकारियों के साथ ही अस्मत लुटा चुकी महिलाओं को न्याय की उम्मीद जगी है।

1994 में हुआ था रामपुर तिराहा कांड…

बतातें चलें कि 02 अक्टूबर 1994 को उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों को दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए जाते समय मुजफ्फरनगर नगर के रामपुर तिराहा पर रोक लिया गया था। जिसके बाद पुलिस फायरिंग में 15 आंदोलनकारियों की शहादत हुई थी व दर्जनों आंदोलनकारी महिलाओं की इज्जत उत्तर प्रदेश पुलिस ने तार-तार कर दी थी।

 

 

 

 

 

 

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